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डर क्या होता है ये उन लोगों के परिवारो से मालूम करो जिन्हें दक्षिणपंथियों ने मौत के घाट उतारा है:- वसीम अकरम त्यागी

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि मुसलमानों में डर का माहौल है, इस पर पलटवार करते हुऐ भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि मुसमलानों के लिये हिन्दुओं से अच्छा कोई दोस्त नही और भारत से अच्छा कोई देश नहीं। सवाल यह पैदा होता है कि हामिद अंसारी ने हिन्दुओं, और देश पर कोई आरोप लगाया था ? देश, हिन्दु, दोस्त कहां से आ गये ? यानी कैसे एक मुद्दे को डाईवर्ट करना है इसे गोयलेबस के वंशज बखूबी समझते हैं। उपराष्ट्रपति जो कह रहे थे उनकी बात को समझा ही नहीं गया, या फिर समझ कर दूसरी तरफ मोड़ने के कोशिश की जा रही है।

डर का माहौल क्या होता है ? यह वातानूकूलित कमरों में बैठकर नहीं मालूम होगा, दादरी के अखलाक के परिवार से मालूम किया जाये कि उसने गांव क्यों छोड़ दिया ? पहलू खान तो मर गये थे, उनके साथी अज्मत से मालूम करो कि खौफ का माहौल है कि नहीं ? झारखंड के बच्चा रक्षको, और गोआतंकियों की भट्ठी में जलने वाले लोगों के परिवारों से मालूम कीजिये कि डर का माहौल है क्या नहीं ?
पश्चिमी यूपी के हापुड़ के एक गांव में मुसलमानों ने पुरानी हो चुकी मस्जिद को गिराकर नई मस्जिद बनाना जैसे ही शुरु किया बस भगवा फौजें पहुंच गईं और धमकी दे डाली कि मस्जिद का निर्माण नहीं होने देंगे।  यूपी के ही अमरोहा के एक गांव में मुसमलान मस्जिद बनाना चाहते हैं मगर एक छुटभैय्या नेता के सामने प्रशासन कहता है कि मस्जिद नहीं बनने देंगे और छुटभैय्या कहता है कि मस्जिद बनी तो …….. बताईये क्या है यह सब ?
सिर्फ मुसलमानों में ही नहीं है डर
दरअस्ल डर का माहौल सिर्फ मुसलमानो में नहीं बल्कि देश के हर एक उस नागरिक में है जो इस देश की संस्कृति, सांझी विरासत से मौहब्बत करता है। यह डर ही था जिसने ट्रेन में काटे जा रहे जुनैद को नहीं बचाया। शाहनवाज हुसैन चाहें तो मुद्दे को डाईवर्ट कर सकते हैं लेकिन सच्चाई पूरी दुनिया जान गई है कुछ दिन पहले न्यूयार्क टाईम्स ने लिखा था “किसी को नही पता भारत में उदार धर्मनिर्पेक्ष सोच रखने वाला कौन आदमी कब मार दिया जाये” अब शाहनवाज चाहें तो शतरमुर्ग की तरह रेत में सर देकर सोच सकते हैं कि सबकुछ ठीक है, लेकिन सच्चाई यह है कि गांधी ने जो सबकुछ ठीक किया था उसमें बहुत कुछ ठीक नही रहा है, वह टूट गया है, टूट रहा है, बिखर रहा है, और डर रहा है।
तीन साल में जो हुआ पहले कभी नही हुआ था
वरिष्ठ पत्रकार शाहनवाज मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में हामिद अंसारी के लिये कुछ यूं लिखा है “बतौर उप-राष्ट्रपति आज हामिद अंसारी साहब का आख़िरी दिन है. वो भारतीय गणराज्य के 12वें उप-राष्ट्रपति हैं। तमाम अच्छी यादों के अलावा हामिद अंसारी इसलिए भी याद किए जाएंगे कि उप-राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उनपर योजनाबद्ध तरीक़े से लगातार हमले किए गए. स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश के उप-राष्ट्रपति पर ऐसे शर्मनाक हमलों का कोई उदाहरण नहीं है।
हमलावरों में आरएसएस, बीजेपी, वीएचपी, बजरंगदल जैसे संगठन और उनके प्रमुख चेहरे थे. इन संगठनों के कई प्रतिनिधि जिनकी हैसियत किसी भी मामले में हामिद अंसारी के घर का टॉयलेट साफ करने की भी नहीं है, समाचार चैनलों ने उन्हें अपने स्टूडियो में बिठाकर हमले करवाए.”
(लेखक वसीम अकरम त्यागी  मुस्लिम टूडे मैग्जीन के सहसंपादक हैं)

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