Skip to main content

अगर आपको दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है तो विज्ञान व प्रशासनिक सेवा मे अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ :- आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा

 

हैदराबाद में स्थित एन आर साइंस सेंटर -कॉम्प्रिहेंसिव एंड ऑब्जेक्टिव स्टडीज में एसएससी छात्रों के विदाई समारोह ( फेयरवेल ) कार्यक्रम का आयोजन गत शनिवार को हुआ जिसमें मुख्य अतिथि आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा व अन्य शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य व प्रबंधक उपस्थित थे।
आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा ने अपने भाषण में छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि - जीवन के दो ही पहलु है एक हार दुसरी जीत और दोनों एक दूसरे के बिना अधूरा है।
आप की जीत तभी होगी जब आप सफल होगे और सफल होने के लिए मेहनत जरुरी है। मनुष्य को सफल होने के लिए तेजस्वी होना आवश्यक नहीं है बल्कि लगन , परिश्रम व पुस्तक के प्रति दिलचस्पी महत्वपूर्ण है।
आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा व
इंजीनियर अफ्फान नोमानी

मै अपने विद्यार्थी जीवन में ज्यादा तेज होनहार नहीं था बल्कि एक मध्यम वर्गों के सूची में गिना -चुना जाता था लेकिन अपने मेहनत, लगन के बुनियाद पर आज आपके सामने एक आइपीएस  ऑफिसर  के हैसियत से मौजूद हु । मुझे खुशी होती है कि अफ्फान नोमानी जैसे नौजवान रिसर्च  स्कालर शिक्षा के छेत्र में प्राचीन व वर्तमान मुसलमानों के हालात के संर्दभ में लिखते -बोलते रहते हैं । मुस्लिम समाज के लिए गर्व की बात है कि एन आर साइंस सेंटर -कॉम्प्रिहेंसिव एंड ऑब्जेक्टिव स्टडीज के प्लेटफार्म से मुस्लिम समाज के नौजवानों में विज्ञान व शोध के प्रति रुचि बढ़ाने व होशला अफजाइ  का जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। लेकिन मुहिम में मजबूती तभी संभव है जब हम सब मिलजुल कर समाज में फैली अशिक्षा जैसी बीमारी का मजबूती से मुकाबला करेंगे। अगर आपको दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है तो विज्ञान व प्रशासनिक सेवा मे अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ । मायूसी समस्या का इलाज नहीं बल्कि बढ़ चढ़ कर हर छेत्र में हिस्सा ले।
कार्यक्रम में कार्यक्रम में एन आर साइंस सेंटर -कॉम्प्रिहेंसिव एंड ऑब्जेक्टिव स्टडीज के चेयरमैन रिसर्च स्कालर इंजीनियर अफ्फान नोमानी   
 ने अपने रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सच्चर कमीटी के रिपोर्ट के मुताबिक हिन्दुस्तान मे हर साल शिक्षण संस्थानों में कम एडमिशन लेने वाले समुदाय में मुसलमान है। 43% ऐसे मुस्लिम छात्र हैं जिसने कभी स्कूल केमप्स नहीं देखा। बीच में पढ़ाई छोड़ देने वालों में से सबसे ज्यादा छात्र मुस्लिम समुदाय से  है। औसतन प्रत्येक साल भारत में 513 पीएचडी स्कालर में मुसलिम पीएचडी स्कालर की  संख्या एक है।
युनेसको के ह्युयन डेवलपमेंट रिपोर्ट ( 2003 ) के मुताबिक  औसतन पुरे विश्व में इस्राइल के नागरिक एक साल में 40 किताब पढ़ता हैं। यूरोपियन नागरिक 35 किताब जबकि मुस्लिम पुरे एक साल में एक या एक से कम किताबें पढ़ता।
कितनी हैरत की बात है कि जिस कोम के प्रवर्तक पर  कुरआन की पहली आयत " इकरा यानी पढ़ो " अवतरित हुआ उस कोम की वर्तमान हालात इतनी दैनिय है कि पुरे विश्व में अध्ययन करने में सबसे निचले दर्जे में शुमार किया जा रहा है। इस रिपोर्ट से अन्दाज़ा लगाया जा सकता है कि प्राचीन काल में हमारा नाम उच्च श्रेणी में लिया जाता था और आज हम निचले पायदान पर है। 

इंजीनियर नोमानी ने आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा  से सहमती जताते हुए कहा कि बिलकुल हमें मायूस होने की जरूरत नहीं है बल्कि हम अपने मेहनत व लगन से अपनी प्रतिभा का छाप पुरी विश्व में दोबारा छोड़ सकते हैं इसके लिए जरुरी है कि मुस्लिम समाज खासकर  शिक्षा पर ज्यादा  जोर दे व मुस्लिम नौजवान ज्यादा से ज्यादा अपना वक्त शिक्षा हासिल करने में लगाए । हम सब को मालुम है कि हमारी आर्थिक स्थिति अन्य समुदाय से कम जरूर है लेकिन अगर हम  संघर्ष कर शिक्षा ग्रहण कर ले तो सारी परेशानी दुर हो जाएगी।
इस मौके पर एनआरएससी के एमडी सेय्यद नजीर व  अन्य अतिथिगण  एडवोकेट अतिथिगण एडवोकेट जाकिर अली, सनराइज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य मोहम्मद मोहसिन , अल-नुर  शिक्षण संस्थान के ख्वाजा मोइज व फहाद खान ने भी अपने विचार व्यक्त किये व छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

Comments

Popular posts from this blog

हैदराबाद में बोर्ड का कार्यक्रम व मौलाना सलमान नदवी विवाद - आखिर मसले का हल क्या ?

इंजीनियर अफ्फान नोमानी हैदराबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन 11 फरवरी 2018 ,रविवार को सफलतापूर्वक  हुआ । 10 व 11 फरवरी को बोर्ड के सदस्यों के बीच अहम बैठक हुई जिसमें तीन तलाक व बाबरी मस्जिद विषय पर सर्वसम्मति से अहम फैसले किए गए जिसमें बाबरी मस्जिद पर दिए बयान से घिरे मौलाना सलमान नदवी का बोर्ड की सदस्यता से निरस्त   करने का फैसला भी इसी कड़ी का अहम हिस्सा रहा। लेकिन मौलाना सलमान नदवी का बोर्ड से सदस्यता निरस्त करने के बाद मदरसों व सोशल मीडिया पर  मुस्लिम हल्कों में जो आपसी मतभेद व खाई बढ़ती हुई दिखाई दे रही है वो मुस्लिम समाज व मुस्लिम संगठनों को इस पर गौर से विचार विमर्श जरूर करना चाहिए कि आखिर आपसी एकता व एकजुटता को कायम कैसे रखा जाए।    मौलाना सलमान नदवी का श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात के बाद बोर्ड पर बढ़ते दबाव के मद्देनजर बोर्ड की चार सदस्यीय टीम ( मौलाना राबेए हसनी नदवी, मौलाना वली रहमानी,  मौलाना मौलाना खालीद सैफुल्लाह रहमानी  व मौलाना अरशद मदनी ) का गठन हुआ जिनके परिणामस्वरूप मौलाना सलमान न...

शिक्षा दिवस पर विशेष:- काश: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद आज होते ?

अफ्फान नोमानी आज हम देश के उस मशहूर शख्सियत को याद करने जा रहे है जिसके जन्मदिन पर पुरा भारत शिक्षा दिवस के रुप में मनाते हैं । और वह शख्स आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री और मशहूर शिक्षाविद्ध मौलाना अबुल कलाम आज़ाद है जिसका का जन्म 11 नवंबर सन् 1888 को विश्व के मशहूर पवित्र धर्म स्थल मक्का में हुआ था।  मौलाना आजाद के शख्सियत को शब्दों व वाक्यों में परिभाषित करना ऐसा है जैसे किसी समुद्र की घेराबंदी करना । विद्वान, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, वक्ता , दर्शनशास्त्री,  इस्लामी स्कालर व  रहनुमाअ,जैसे प्रतिष्ठित शब्दों में भी कैद नहीं किया जा सकता। मौलाना आजाद को न सिर्फ आजादी की लड़ाई में एक योद्धा के रुप में या आजादी के बाद सिर्फ़ शिक्षा मंत्री के रुप देखा जा सकता है बल्कि मौलाना आजाद की शख्सियत को जिन्दगी के हर पहलू में उसके किरदार को याद किया जा सकता है।  हकीकत तो यह है कि मौलाना आजाद के इल्म व प्रतिभा का फायदा महात्मा गांधी, नेहरू व पटेल ने उठाया लेकिन मुसलमानों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना ही नहीं ओर उनको  कांग्रेस के नेता के रूप में देखते रहे। अभी हाल ही में मौलान...

कोरेगांव : सन् 1857 में महार, मराठा व मुस्लिम ने ब्रिटिश के खिलाफ एक साथ लड़ाई लड़ी

अमरेश मिश्रा / अफ्फान नोमानी एक इतिहासकार के रूप में, मैंने हमेशा कोरेगांव के लड़ाई का जश्न एक समर्थक औपनिवेशिक मामले के रूप में पाया। फिर भी, मैं घटना को एक उत्सव मनाने के लिए दलित कार्यकर्ताओं को दोष देने में सक्षम नहीं हूं। तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान, 1 जनवरी 1818 को वास्तव में क्या हुआ था, इसको लेकर एक अच्छे पढ़ें-लिखे जानकार व्यक्ति भी अनजान हैं। तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध दो चरम सीमाएं हैं - एक है जो कोरेगांव को पेशवाओं के खिलाफ 'महार वीरता ' की पुष्टि के रूप में देखता है। और दूसरा जो 'पेशवा वीरता' की कहानियों पर आधारित है जिसमें मराठों की सेना के 28,000 सैनिक ब्रिटिशों की लड़ाई में मारे गए थे! क्या आप संभाजी भिडे और एकबोटे के बारे में जानते हैं? आरएसएस-बीजेपी के दो लोगों, संभाजी भिडे और एकबोटे की भूमिका को अगर आप जानेंगे तो काफी आश्चर्यचकित होगा, जो अभी सबके सामने जगजाहिर हुआ है। भूतपूर्व में हुए विभिन्न समारोह में भिडे और एकबोटे दलित हितैषी दिखने व सम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए ब्राह्मण व मुस्लिमों के खिलाफ नफरत की बाज़ार गर्म किया कर...