28 अक्टूबर 2020 ( गोड्डा ) - झारखंड के गोड्डा ज़िले के 23 वर्षीय हाफ़िज़ इमरान ने एक मिसाल कायम कर दिया है. मध्यम वर्ग में पले बड़े हाफ़िज़ इमरान ने पढ़ाई के दौरान कई कठिनाईयों का सामना किया. मुश्किल हालात के मद्देनज़र ही सोच लिया था की पढ़ाई कर हम भी गरीब व यतीम बच्चों को मुफ्त में खाना व तालीम देने का ज़िम्मेदारी उठायेंगे. आज इस्लामिआ मारिफुल कुरआन नामक इदारा कायम कर अपने सपने को सच कर दिखाया. इस्लामिआ मारिफुल कुरआन हैदराबाद के लंगर हाउस में कायम किया है जहाँ गरीब बच्चों को दीनी व दुनयावी तालीम देने के साथ रहने सहने का भी व्यवस्था है. इस इदारे में ज्यादातर बच्चे यूपी बिहार झारखंड के है. जहाँ सभी बच्चे कई शिक्षकों के निगरानी में रहते है. जो लोग अपने बच्चों को इस इदारे में भेजना चाहते है वैसे लोग इस नंबर ( 8210250669/8019524209 ) से संपर्क कर सकते है. और वैसे हज़रात जो इस काम में मदद करना चाहते है हाफ़िज़ इमरान से संपर्क कर मदद कर सकते है.
मैनें पहली बार 2009 में विख्यात ब्रिटिश भौतिकविद् और कॉस्मोलॉजिस्ट स्टीफन हॉकिंग का नाम अपने विज्ञान शिक्षक से दशम वर्ग में सुना था । सन् 2010 में आईएससी के दौरान स्टीफन हॉकिंग की मशहूर किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' पढ़ने का अवसर मिला। उस समय किताब में मौजूद सिद्धांत को समझना मेरे लिए आसान नहीं था लेकिन बी.टेक के दौरान दोबारा पढ़ा तो बहुत बातें समझ में आने लगी जिससे मैं काफी प्रभावित हुआ और ब्रह्मांडीय रहस्य को जानने में रूचि बढ़ने लगी। ब्रह्मांड के रहस्यों पर उनकी किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' काफी चर्चित हुई थी. इस किताब में उन्होंने बिग बैंग सिद्धांत, ब्लैक होल, प्रकाश शंकु और ब्रह्मांड के विकास के बारे में नई खोजों का दावा कर दुनिया भर में तहलका मचा दिया था. शायद यही वजह रही है कि धार्मिक मतभेद के बावजूद स्टीफन हॉकिंग हमारे पसंदीदा वैज्ञानिकों में से एक रहे। मोटर न्युरोन बीमारी से पीड़ित ( जिसमें शरीर काम करना बंद कर देता है ) होने के बावजूद अपने अद्भुत विचार : " ऊपर सितारों की तरफ देखो अपने पैरों के नीचे नहीं। जो देखते हो उसका मतलब जानने की कोशिश ...

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