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मौलाना आजाद रिसर्च सेंटर स्थापित करने का प्लान :- फिरोज बख्त अहमद

MANUU के चान्सलर फिरोज बख्त अहमद ने  इंजीनियर अफ्फान नोमानी के रिसर्च वर्क को सराहा   मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी,हैदराबाद  के चान्सलर फिरोज बख्त अहमद का रिसर्च स्कालर इंजीनियर अफ्फान नोमानी व शाहीन एजुकेशनल एन्ड रिसर्च फाउंडेशन के नुमाइंदों के बीच मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी ,हैदराबाद में अहम मीटिंग हुई। मीटिंग में पश्चिमी व भारतीय दर्शन, वर्तमान में राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक स्तर पर  भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर चर्चा हुई। इंजीनियर अफ्फान नोमानी ने विज्ञान व दर्शनशास्त्र पर  शोध के आधार पर अपने विचार व्यक्त किया। चान्सलर फिरोज बख्त अहमद ने  इंजीनियर अफ्फान नोमानी के रिसर्च वर्क की सराहना करते हुए कहा कि आज की तारीख में मुस्लिम समाज से निकलें छात्रों को इस अहम विशेष पर शोध कार्य करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना ही काफी नहीं है बल्कि आगे की पढ़ाई व शोध कार्य  करना बहुत जरूरी है। बहुत खुशी की बात है कि अफ्फान नोमानी जैसे नौजवान इसमें दिलचस्पी ले रहे है। अगर हम थोड़ा परेशानी उठाकर शैक्षणिक स...

असिफा कांड : सवालों के घेरे में पुलिस , पुजारी व सरकार :- अफ्फान नोमानी

मुझे याद है जब 16 दिसंबर 2012 निर्भया कान्ड के बाद देश में हाहाकार मच गया था लोग इन्साफ के लिए कश्मीर से कन्या कुमारी तक सड़कों पर उतर आये थे। सड़कों से लेकर संसद तक हिल गया था। बीजेपी के स्मृति ईरानी सहित अन्य नेतागण प्रत्येक बलात्कार आरोपी को फांसी की मांग कर रहे थे। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि जम्मू के कठुआ की एक असिफा नाम की आठ साल की मासूम नाबालिग लड़की की बलात्कार व हत्या पर बीजेपी के स्मृति ईरानी सहित बड़े-बड़े बीजेपी के दिग्गज व अन्य पार्टी के नेतागण चुप्पी साधे हुए हैं । शान्ति जुलूस निकालते हैदराबाद के नौजवान असिफा कांड में कई सवाल व राज छुपे हुए है । आठ साल की मासूम नाबालिग लड़की असिफा का जम्मू के कठुआ के रसाना गांव से 10 जनवरी 2018 को लापता होती है, 12 जनवरी 2018 को लड़की के पिता लापता होने का केस दर्ज करता है और 17 जनवरी को बुरी तरह छति-ग्रस्त लाश सामने आता है। बात मीडिया में आग की तरह फैली और आला अधिकारी के अगुआई में जाँच पड़ताल के बाद दिल को दहला देने वाली खबरें सामने आई कि जो मासूम नाबालिग लड़की लापता थी उनकी 7 दिनों तक स्थानीय मन्दिरो में बलात्का...

स्टीफन हॉकिंग का निधन विश्व विज्ञान का बड़ा नुकसान :- इंजीनियर अफ्फान नोमानी

मैनें पहली बार 2009 में विख्यात ब्रिटिश भौतिकविद् और कॉस्मोलॉजिस्ट स्टीफन हॉकिंग का नाम अपने विज्ञान शिक्षक से दशम वर्ग में सुना था । सन् 2010 में आईएससी के दौरान स्टीफन हॉकिंग की मशहूर किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' पढ़ने का अवसर मिला। उस समय किताब में मौजूद सिद्धांत को समझना मेरे लिए आसान नहीं था लेकिन बी.टेक के दौरान दोबारा पढ़ा तो बहुत बातें समझ में आने लगी जिससे मैं काफी प्रभावित हुआ और ब्रह्मांडीय रहस्य को जानने में रूचि बढ़ने लगी।  ब्रह्मांड के रहस्यों पर उनकी किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' काफी चर्चित हुई थी. इस किताब में उन्होंने बिग बैंग सिद्धांत, ब्लैक होल, प्रकाश शंकु और ब्रह्मांड के विकास के बारे में नई खोजों का दावा कर दुनिया भर में तहलका मचा दिया था. शायद यही वजह रही है कि धार्मिक मतभेद के बावजूद स्टीफन हॉकिंग हमारे पसंदीदा वैज्ञानिकों में से एक रहे। मोटर न्युरोन बीमारी से पीड़ित ( जिसमें शरीर काम करना बंद कर देता है ) होने के बावजूद अपने अद्भुत विचार : " ऊपर सितारों की तरफ देखो अपने पैरों के नीचे नहीं। जो देखते हो उसका मतलब जानने की कोशिश ...

अगर आपको दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है तो विज्ञान व प्रशासनिक सेवा मे अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ :- आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा

  हैदराबाद में स्थित एन आर साइंस सेंटर -कॉम्प्रिहेंसिव एंड ऑब्जेक्टिव स्टडीज में एसएससी छात्रों के विदाई समारोह ( फेयरवेल ) कार्यक्रम का आयोजन गत शनिवार को हुआ जिसमें मुख्य अतिथि आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा व अन्य शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य व प्रबंधक उपस्थित थे। आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा ने अपने भाषण में छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि - जीवन के दो ही पहलु है एक हार दुसरी जीत और दोनों एक दूसरे के बिना अधूरा है। आप की जीत तभी होगी जब आप सफल होगे और सफल होने के लिए मेहनत जरुरी है। मनुष्य को सफल होने के लिए तेजस्वी होना आवश्यक नहीं है बल्कि लगन , परिश्रम व पुस्तक के प्रति दिलचस्पी महत्वपूर्ण है। आइपीएस ऑफिसर खलील पाशा व इंजीनियर अफ्फान नोमानी मै अपने विद्यार्थी जीवन में ज्यादा तेज होनहार नहीं था बल्कि एक मध्यम वर्गों के सूची में गिना -चुना जाता था लेकिन अपने मेहनत, लगन के बुनियाद पर आज आपके सामने एक आइपीएस  ऑफिसर  के हैसियत से मौजूद हु । मुझे खुशी होती है कि अफ्फान नोमानी जैसे नौजवान रिसर्च  स्कालर शिक्षा के छेत्र में प्राचीन व वर्तमान मुसलमानों क...

हैदराबाद में बोर्ड का कार्यक्रम व मौलाना सलमान नदवी विवाद - आखिर मसले का हल क्या ?

इंजीनियर अफ्फान नोमानी हैदराबाद में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन 11 फरवरी 2018 ,रविवार को सफलतापूर्वक  हुआ । 10 व 11 फरवरी को बोर्ड के सदस्यों के बीच अहम बैठक हुई जिसमें तीन तलाक व बाबरी मस्जिद विषय पर सर्वसम्मति से अहम फैसले किए गए जिसमें बाबरी मस्जिद पर दिए बयान से घिरे मौलाना सलमान नदवी का बोर्ड की सदस्यता से निरस्त   करने का फैसला भी इसी कड़ी का अहम हिस्सा रहा। लेकिन मौलाना सलमान नदवी का बोर्ड से सदस्यता निरस्त करने के बाद मदरसों व सोशल मीडिया पर  मुस्लिम हल्कों में जो आपसी मतभेद व खाई बढ़ती हुई दिखाई दे रही है वो मुस्लिम समाज व मुस्लिम संगठनों को इस पर गौर से विचार विमर्श जरूर करना चाहिए कि आखिर आपसी एकता व एकजुटता को कायम कैसे रखा जाए।    मौलाना सलमान नदवी का श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात के बाद बोर्ड पर बढ़ते दबाव के मद्देनजर बोर्ड की चार सदस्यीय टीम ( मौलाना राबेए हसनी नदवी, मौलाना वली रहमानी,  मौलाना मौलाना खालीद सैफुल्लाह रहमानी  व मौलाना अरशद मदनी ) का गठन हुआ जिनके परिणामस्वरूप मौलाना सलमान न...

कोरेगांव : सन् 1857 में महार, मराठा व मुस्लिम ने ब्रिटिश के खिलाफ एक साथ लड़ाई लड़ी

अमरेश मिश्रा / अफ्फान नोमानी एक इतिहासकार के रूप में, मैंने हमेशा कोरेगांव के लड़ाई का जश्न एक समर्थक औपनिवेशिक मामले के रूप में पाया। फिर भी, मैं घटना को एक उत्सव मनाने के लिए दलित कार्यकर्ताओं को दोष देने में सक्षम नहीं हूं। तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान, 1 जनवरी 1818 को वास्तव में क्या हुआ था, इसको लेकर एक अच्छे पढ़ें-लिखे जानकार व्यक्ति भी अनजान हैं। तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध दो चरम सीमाएं हैं - एक है जो कोरेगांव को पेशवाओं के खिलाफ 'महार वीरता ' की पुष्टि के रूप में देखता है। और दूसरा जो 'पेशवा वीरता' की कहानियों पर आधारित है जिसमें मराठों की सेना के 28,000 सैनिक ब्रिटिशों की लड़ाई में मारे गए थे! क्या आप संभाजी भिडे और एकबोटे के बारे में जानते हैं? आरएसएस-बीजेपी के दो लोगों, संभाजी भिडे और एकबोटे की भूमिका को अगर आप जानेंगे तो काफी आश्चर्यचकित होगा, जो अभी सबके सामने जगजाहिर हुआ है। भूतपूर्व में हुए विभिन्न समारोह में भिडे और एकबोटे दलित हितैषी दिखने व सम्प्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए ब्राह्मण व मुस्लिमों के खिलाफ नफरत की बाज़ार गर्म किया कर...

समाज में जिन बातों, वंश, भाषा, पेशा, क्षेत्र, रंग आदि के आधार पर ऊच नीच और अन्याय को बढ़ावा मिलता है इस्लाम ने सब को ढाह दिया है :- मौलाना अब्दुल हमीद नोमानी

20 अक्टूबर 2017 को मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर में इंस्टिट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज ( आइओएस ) और मारवाड़ी मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी के तत्वावधान में समानता, न्याय पर आयोजित सीमिनार में ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा व मुशावरत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अब्दुल हमीद नोमानी ने भारतीय सन्दर्भ में समानता, न्याय मुद्दे पर चर्चा करते हुए कहा कि उस पर गम्भीरता से सोचने की जरूरत है, समाज में जिन बातों, वंश, भाषा, पेशा, क्षेत्र, रंग आदि के आधार पर ऊच नीच और अन्याय को बढ़ावा  मिलता है इस्लाम ने सब को ढाह दिया है. व्यावहारिक रूप से केवल इस्लाम ही समानता तक पहुंच पाया हे जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा है, जब तक हम मूल आपत्ति को समझ कर चर्चा नहीं करेंगे तब तक केवल कुछ पुरानी बातों को दोहराने से बात नहीं बनेगी . कुरआन और हदीस के मूल को सामने रखते हुए आज के संदर्भ में बात करना जरूरी हे. इस क्रम में जिजया, दासपरथा और विवाह के संबंध में इस्लामी शरीयत के हवाले से जो बात कही जाती हे उस की सही ब्याखया की आवश्यकता है क्योंकि कि इन ही 3 मुद्दे को लेकर पश्चिमी विद्वानों और हिन्दुत्व वादी लेखकों ने आ...