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कॉम्प्रिहेंसिव फिजिकल साइंस किताब एसएससी टॉपर छात्रों की पहली पसंद

फरवरी 2019 में शाहीन  एजुकेशनल एन्ड रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित रिसर्च स्कालर इंजीनियर अफ्फान नोमानी की मशहूर किताब " कॉम्प्रिहेंसिव फिजिकल साइंस "  दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए पहली पसंद बना हुआ है।  बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन तेलंगाना  स्टेट  द्वारा आयोजित  एसएससी के परीक्षा में औसतन 9.8 GPA व साइंस में 10 GPA  लाकर सीपएच स्कूल टॉपर बनी तसलीम फातिमा   कहती है कि " कॉम्प्रिहेंसिव फिजिकल साइंस किताब की सबसे अच्छी खूबसूरती यह है कि प्रत्येक अध्याय ( chapter ) के कनसेप्ट  को डाइग्राम के साथ गहराई से विश्लेषण किया है। इस किताब की सबसे रोचक तथ्य यह है कि सभी कनसेप्ट  व एक्टिविटि  को अलग अलग कर स्पष्ट रूप से वर्णन ( Explain ) किया है। इस किताब की सबसे बड़ी खुशुसियत यह है कि  रट कर पढ़ने के बजाय  स्पष्ट एक्टिविटि व सही कनसेप्ट को प्रमुखता से वर्णन किया है जो अन्य पाठ्यपुस्तकों ( Textbook ) से  कॉम्प्रिहेंसिव फिजिकल साइंस किताब को अलग करता है". एन आर साइंस सेंटर की टॉपर आयशा ( 9.2 GPA )  कहती है कि " कॉम्प्रिह...

बुर्का प्रतिबंध : भारतीय संस्कृति, संविधान व भौगोलिक दृष्टिकोण से सही या गलत ? :- अफ्फान नोमानी

Pic :  Zainab Rashid चुनाव के वक्त शिवसेना द्वारा छोड़ा गया शगूफ़ा " बुर्का प्रतिबंध " का बहस शुद्ध रूप से राजनीति से प्रेरित है । भारत के पड़ोसी देश श्री लंका में बुर्का प्रतिबंध पर बहस हो और भारत जैसे देश में जहाँ मुस्लिमों से जुड़े हर वो मुद्दे जिसपर राजनीतिक पार्टी अपनी रोटीया सेकते हो वहाँ इस तरह के मुद्दों पर बहस होना स्वाभाविक है । भारत के इतिहास में आजतक किसी भी आतंकवादी घटना में बुर्क़ा का इस्तेमाल नहीं हुआ है। रेलवे स्टेशन हो या अन्य सरकारी एजेंसियों का दफ्तर हो बुरक़ापोश महिलाओं की तलाशी वैसे ही होती हैं जैसे अन्य महिलाओं की होती हैं। देश की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए भारत जैसे देश में बुर्का पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता , यह बात मैं भारत की भौगोलिक, राजनीतिक व धार्मिक महत्व के बुनियाद पर काफी मजबूती से कह सकता हूं । बुर्का पर प्रतिबंध हमारी देश की संस्कृति व सभ्यता के भी खिलाफ है । देश की संस्कृति व संविधान के रोशनी में भारतीय पहनावे पर एक लम्बी बहस है। अगर हम भारतीय दर्शन शास्त्र व भारतीय संस्कृति की रोशनी में भारतीय परिवेश व परम्परा का अध्...

बेगूसराय पर अन्तिम विश्लेषण: जनता का रुख किस ओर ? :- अफ्फान नोमानी

11 अप्रैल 2019 को बेगुसराय पर लिखे लेख के 17 दिन बाद यह मेरा दुसरा विश्लेषण है . आज से 17 दिन पहले बेगूसराय का माहौल अलग था जब कुछ जाने माने विश्लेषकों का विश्लेषण 2014 के चुनाव व जाति पर आधारित था जिसमें कन्हैया को तीसरे नंबर का उम्मीदवार बताया गया था लेकिन अब माहौल कुछ अलग है , सर्वप्रथम कन्हैया ने हर वर्ग के युवाओं व कुछ राजनीतिक समझ रखने वाले को लेकर जिला व प्रखन्ड स्तर पर 100-100 का समूह बनाकर डोर टु डोर कम्पेन करने का पहला प्लान बनाकर बेगूसराय के भूमिहार, मुस्लिम, दलित व यादव जाति के मिथक तोड़ने का पहला प्रयास किया । कन्हैया ने खुद व अपने समर्थकों को जनाब तनवीर हसन साहब पर निजी टिप्पणी करने से परहेज कर लगातार भाजपा पर प्रहार किया जिसकी वजह से मुसलिम पक्षों का झुकाव बढ़ने लगा जिसमें शिक्षक व युवा वर्गों व का समर्थन मिलना शुरू हुआ । वर्तमान में बेगूसराय के मुस्लिम कन्हैया व तनवीर हसन में बटे हुए। तनवीर हसन के लिए बाहर से आये समर्थकों ने मुस्लिम लोबि का हव्वा कुछ ज्यादा ही खड़ा कर दिया जिससे अन्य समुदाय का आकर्षण घट गया। 2014 के चुनाव में तनवीर हसन को मुस्लिम समुदाय का पुरा व या...

युवाओं व गरीब- मजलूमों की आवाज है कन्हैया कुमार : इंजीनियर अफ्फान नोमानी

इंजीनियर अफ्फान नोमानी             कन्हैया कुमार शाहीन एजुकेशनल एन्ड रिसर्च फाउंडेशन के रिसर्च स्कालर व कॉम्प्रिहेंसिव फिजिकल साइंस के युवा लेखक इंजीनियर अफ्फान नोमानी ने कहा कि धर्म के आधार पर वैचारिक दृष्टिकोण से कन्हैया कुमार से आप सहमत व असहमत हो सकते है, यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के संदर्भ में सही भी है और इसमें किसी को दिक्कत नहीं है लेकिन धर्म व जाति के आधार पर किसी उम्मीदवार का चुनाव करना यह असंवैधानिक है।  वर्तमान में देश जिस मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहा है - जहाँ मोब लिंचिंग आम होता जा रहा है, गरीब- मजलूम की आवाज़ को दबाया जा रहा है, स्वतंत्र लिखने- बोलने वालों पर अन्कुश व भारतीय संविधान प्रणाली पर मनुवादी व्यवस्था को थोपने का जो प्रयास चल रहा है ऐसे हालात में सम्प्रदायिक शक्तियों के कट्टरपंथी , मनुवादी व सन्घ के सामन्तवादी विचारधारा के खिलाफ लड़ने वाले निडर व बेबाक युवा नेता कन्हैया कुमार का संसद में होना बहुत जरूरी है। कन्हैया कुमार चुकी एक गरीब परिवार से आते है जिन्होंने गरीबी, बेरोजगारी को काफी करीब से देखा है।  संसद में शिक्...

हां मैं डॉक्टर कन्हैया कुमार हूं

नाज़िश हुमा क़ासमी  जी बेहतरीन वक्ता, गंभीर बातें करके अपनी बात जनता तक पहुंचाने वाला, निडर, बेबाक मिलनसार, हंसमुख, तीखी छाप छोड़ने वाला डॉक्टर कन्हैया कुमार हूं, हाँ मैं सरकार की नाकामी पर उससे प्रश्न करने वाला, सांप्रदायिकता से स्वतंत्रता का नारा देने वाला, भगवाइयों को भयभीत करने वाला, संविधान को बचाने के लिए प्रयास करने वाला, अल्पसंख्यक पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाला, सरकार की नाकामी गिनवाने वाला, "बिहार से तिहाड़ का लेखक", जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का पूर्व छात्र नेता और बेगूसराय से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया का लोकसभा उम्मीदवार कन्हैया कुमार हूं। मेरा जन्म 1987 में बिहार के बेगूसराय जनपद के बरोनी गांव के निकट विधानसभा के बेहट ग्राम सीपीआई के गढ़ में हुआ। मैं भूमिहार जाति से संबंध रखने वाला, मेरे पिता का नाम जयशंकर सिंह है जो पैरालिसिस के मरीज हैं और लंबे समय से बिस्तर पर हैं। मेरी माता का नाम मीना देवी है जो आंगनवाड़ी में काम करती हैं और वहां से मिलने वाली थोड़ी आमदनी से इस काबिल बनाया कि आज मैं सैकड़ों नौजवानों के दिलों की आवा...

शिक्षा दिवस पर विशेष:- काश: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद आज होते ?

अफ्फान नोमानी आज हम देश के उस मशहूर शख्सियत को याद करने जा रहे है जिसके जन्मदिन पर पुरा भारत शिक्षा दिवस के रुप में मनाते हैं । और वह शख्स आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री और मशहूर शिक्षाविद्ध मौलाना अबुल कलाम आज़ाद है जिसका का जन्म 11 नवंबर सन् 1888 को विश्व के मशहूर पवित्र धर्म स्थल मक्का में हुआ था।  मौलाना आजाद के शख्सियत को शब्दों व वाक्यों में परिभाषित करना ऐसा है जैसे किसी समुद्र की घेराबंदी करना । विद्वान, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, वक्ता , दर्शनशास्त्री,  इस्लामी स्कालर व  रहनुमाअ,जैसे प्रतिष्ठित शब्दों में भी कैद नहीं किया जा सकता। मौलाना आजाद को न सिर्फ आजादी की लड़ाई में एक योद्धा के रुप में या आजादी के बाद सिर्फ़ शिक्षा मंत्री के रुप देखा जा सकता है बल्कि मौलाना आजाद की शख्सियत को जिन्दगी के हर पहलू में उसके किरदार को याद किया जा सकता है।  हकीकत तो यह है कि मौलाना आजाद के इल्म व प्रतिभा का फायदा महात्मा गांधी, नेहरू व पटेल ने उठाया लेकिन मुसलमानों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना ही नहीं ओर उनको  कांग्रेस के नेता के रूप में देखते रहे। अभी हाल ही में मौलान...

मौलाना आजाद रिसर्च सेंटर स्थापित करने का प्लान :- फिरोज बख्त अहमद

MANUU के चान्सलर फिरोज बख्त अहमद ने  इंजीनियर अफ्फान नोमानी के रिसर्च वर्क को सराहा   मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी,हैदराबाद  के चान्सलर फिरोज बख्त अहमद का रिसर्च स्कालर इंजीनियर अफ्फान नोमानी व शाहीन एजुकेशनल एन्ड रिसर्च फाउंडेशन के नुमाइंदों के बीच मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी ,हैदराबाद में अहम मीटिंग हुई। मीटिंग में पश्चिमी व भारतीय दर्शन, वर्तमान में राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक स्तर पर  भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर चर्चा हुई। इंजीनियर अफ्फान नोमानी ने विज्ञान व दर्शनशास्त्र पर  शोध के आधार पर अपने विचार व्यक्त किया। चान्सलर फिरोज बख्त अहमद ने  इंजीनियर अफ्फान नोमानी के रिसर्च वर्क की सराहना करते हुए कहा कि आज की तारीख में मुस्लिम समाज से निकलें छात्रों को इस अहम विशेष पर शोध कार्य करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना ही काफी नहीं है बल्कि आगे की पढ़ाई व शोध कार्य  करना बहुत जरूरी है। बहुत खुशी की बात है कि अफ्फान नोमानी जैसे नौजवान इसमें दिलचस्पी ले रहे है। अगर हम थोड़ा परेशानी उठाकर शैक्षणिक स...